कच्ची घानी का तेल खायें !

राजीव भाई

आधुनिक विज्ञान ने हमें तेल के नाम पर विष खाने के लिए विवश कर दिया है। आज रिफाइंड तेल बनाने के नाम पर हमारे स्वास्थ्य के लिये लाभदायक महत्वपूर्ण घटक (गंध, चिपचिपापन) निकाल लिये जाते है। तेल की मूल गंध जो प्रोटीन होती है और चिपचिपापन जिसके कारण उसे तेल कहते हैं उसके निकलने के बाद वह तेल नहीं है तेल जैसा पदार्थ रह जाता है। रिफाइंड बनाने की इस प्रक्रिया में उसमें कर्इ हानिकारक रसायन ज़हर भी मिलाये जाते है। इसके साथ ही कानून की मदद से इसमें Palm oil मिलाकर बाजार में बेचा जा रहा है। जब से हम रिफाइंड तेल खाने लगे हैं तब से रक्त चाप, कैंसर, ह्रदयघात जैसे रोगों में गुणात्मक वृद्धि हुर्इ है।

ओयल

पहले तेल में गैसोलीन नामक केरोसिन फेमिली का रसायन मिलाकर उसे पतला किया जाता है फिर उसमें हेक्सेन मिलाकर खूब हिलाया जाता है और तेल में उपस्थित महत्वपूर्ण घटक Fatty Acid और विटामिन-र्इ तथा Minerals निकाल लिए जाते हैं जबकि हमारा शरीर इनको स्वयं नहीं बना पाता, इसी कारण ये तत्व हमें तेल से प्राप्त होते हैं। फिर इस तेल को 300 फैरेनहाइट पर उबाला जाता है ताकि गैसोलीन और हेक्सेन की दुर्गन्ध को दूर किया जा सके, तेल का मटमैला रंग निकालकर उसे ट्रांसपेरेन्ट बनाने के लिए ब्लीचिंग किया जाता है जिसके कारण वीटा केरोटिन और क्लोरोफिल खत्म हो जाता है,  ये तत्व हमारे शरीर में कोलेस्ट्राल घटाने का काम करते हैं। इसके बाद Degumming प्रक्रिया द्वारा तेल के महत्वपूर्ण घटकों Phosphalipiel तथा Lecithene को निकाल लिया जाता है जिससे तेल और अधिक पतला हो जाता है। फिर तेल से उसकी दुर्गन्ध निकालने के लिए तेल को 464 डिग्री फैरेनहाइट पर गर्म किया जाता है और सबसे अन्त में इस घटिया और तत्वहीन तेल को लम्बे समय तक टिकाये रखने के लिये उसमें प्रिजरवेटिव के रुप में Synthetic Anti Oxidants डाले जाते हैं। अब आप ही सोचिए कि हम तेल खा रहे हैं या विष ?

खाने के लिए घानी का तेल ही सबसे अच्छा होता है क्योंकि इसमें तेल को पेरते समय उसका तापमान 20 - 25 अंश सेन्टीग्रेट से ऊपर नहीं जाता जिससे उस तेल के तत्व नष्ट नहीं होते। जबकि रिफाइंड तेल को बनाने में उच्च तापमान का उपयोग किया जाता है और एक बार उच्च तापमान पर बना तेल दोबारा खाने योग्य नहीं होता । इसलिये खाने के लिये घानी का तेल ही सर्वोत्तम है अतः आप अपने-अपने क्षेत्र में घानी लगायें और घानी का तेल ही खायें ।


Nov 26, 2013


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         राजीव भाई द्वारा बताये गये राजनैतिक व्यवस्था परिवर्तन पर चिंतन समारोह 

      हम सभी राजीव भाई से जुड़े हैं, कोई उन्हें अपना गुरु मानता है, कोई अपना आदर्श मानता है, कोई नेता मानता है और कोई सखा   मानता है | लेकिन हम सब उनके विचारों से ओतप्रोत होकर अपने-   अपने सामर्थ्य और प्रतिभा के हिसाब से उनके विचारों के आधार   पर भारत को नवनिर्मित करने का सपना देखते हैं और लगे भी रहते हैं | 
     राजीव भाई को देह छोड़े आठ वर्ष हो गए हैं | इन आठ वर्षों में राजीव भाई को सुनने वाले, उन्हें समझने वाले और उनके बताये नियमों   को अपनाने वालों की संस्था 10 करोड़ से ऊपर है | लेकिन यह   10 करोड़ की संख्या संगठित नहीं है | इसलिए दिखाई नहीं देती |
     सेवाग्राम, वर्धा उनकी कर्मभूमि रही है | 1997 से लेकर 2008 तक राजीव भाई ने यहीं से अपना स्वदेशी विचारों का रथ पूरे देश में   घुमाया, हजारों व्याख्यान किये और स्वदेशी के विचार पर देश   को  नवनिर्मित करने का स्वप्न दिखाया |
     आज पूरे देश में राजीव भाई के विचारों पर आधारित गुरुकुल खुल रहे हैं गौशालायें खुल रही हैं, विष मुक्त कृषि हो रही हैं, व्यवस्था   परिवर्तन के लिए राजनैतिक पहल भी हो रही है यानी राजीव   भाई  ने जिन विषयों पर व्यवस्था परिवर्तन की बात कही है | उन सभी   विषयों पर अलग - अलग ढंग से कार्य चल रहा है और यह कार्य आगे लगातार बढ़ता ही जायेगा इस तरह के हजारों प्रयोग और   भी   होते ही रहेंगे |
     हमारी कोशिश है की उन सभी को एक दिशा दी जा सके ताकि भविष्य में राजीव भाई के विचारों को एक समग्रता दी जा सके और   भविष्य के भारत को गढ़ने में हमारी भी भूमिका हो |
     दिल्ली और पश्चिमी उ. प्र. के कुछ साथियों ने राजीव भाई के विचारों के आधार पर एक राजनैतिक पहल की शुरुआत की है | राजीव   भाई के व्यवस्था परिवर्तन के विचारों को स्वीकार करने वाले   सभी  दलों में हैं | राजीव भाई के साथ काम करने वाले काफी लोग अलग -अलग दलों में भी चले गए काफी लोग आम आदमी पार्टी में गये हैं, कुछ भाजपा में गये हैं और कुछ अन्य छोटी - छोटी   पार्टियां बनाकर   कुछ - कुछ करते रहते हैं या करना चाहते हैं |
     हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं की अपने अंतिम समय में राजीव भाई ने 'भारत स्वाभिमान' बनवाकर व्यवस्था परिवर्तन के लिए एक   बड़ा दल खड़ा करने की तैयारी शुरू कर दी थी लेकिन नीयति   को शायद मंजूर नहीं था उनका सपना अधूरा ही रह गया | अब कुछ   साथी उस पहल को फिर से एक नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं |
     ऐसे ही कुछ साथियों का एक सम्मेलन सेवाग्राम में हो रहा है | 26 -27 जनवरी को...
     इन सभी कार्यक्रमों को राजीव भाई के पूज्य माता जी एवं पिताजी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है | माता जी और पिताजी   ने सभी राजीववादियों से एक जुट होकर राजीव भाई के   सपनों  को पूरा करने का आव्हाहन किया है | 
          आप सभी आमंत्रित हैं | 
     राजीव दीक्षित संस्था,
     10 जोतवानी ले आऊट 
     सेवाग्राम वर्धा रोड, सेवाग्राम ,वर्धा (महाराष्ट्र)
     पंजीकरण के लिए संपर्क करें- 6307329201 /8861631115 /8380027017 /7774069692 

     स्थल : स्वदेशीग्राम, सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्ट्र )

     आप सभी क्रान्तिवीर राजीव दीक्षित जी के सपनो को पूरा करने का संकल्प लेने वर्धा पहुंच रहे है या इस महासंकल्प को धारण कर   रहे  है । आप सब से निवेदन है इस महायज्ञ की व्यवस्था में तन,मन, आत्मा के साथ अर्थ भी महत्वपूर्ण है और यह व्यवस्था हम सब   क्रान्तिवीर  भाइयों को मिलकर ही करनी है अतः आप सब 200/-रुपये अर्थ का सहयोग करे, इस सहयोग में आपकी सदस्यता   सहयोग भी  सम्मिलत माना जायेगा.....वंदेमातरम