गौशाला और पंचगव्य उत्पादों के प्रयोग

गौशाला

गौशाला और पंचगव्य उत्पादों के प्रयोग 

 गाय का विषय राजीव भाई का प्रिय विषय है | क़त्ल खानों में जाने वाली गायों को रोकने के लिए उनके गोबर, गोमूत्र से पंचगव्य उत्पाद बनाकर तथा खेती में प्रयोग होने वाली गोबर खाद व कीट नियंत्रक बनाकर गाय को बचाया जा सकता है और उनकी सेवा की जा सकती है | इस उद्देश्य से एक गौशाला और पंचगव्य उत्पादों का उत्पादन और प्रशिक्षण करने की योजना है और गाँव-गाँव में उनकी जानकारी पहुंचे इसकी तैयारी चल रही है |

आप सभी के साथ से ही यह शुभ कार्य सफल होगा |

इसमें तन, मन, धन का सहयोग अपेक्षित है |

गाय का दूध बहुत ही पौष्टिक होता है। यह बीमारों और बच्चों के लिए बेहद उपयोगी आहार माना जाता है। इसके अलावा दूध से कई तरह के पकवान बनते हैं। दूध से दही, पनीर, मक्खन और घी भी बनाता है। गाय का घी और गोमूत्र अनेक आयुर्वेदिक औषधियां बनाने के काम भी काम आता है। गाय का गोबर फसलों के लिए सबसे उत्तम खाद है। गाय के मरने के बाद उसका चमड़ा, हड्डियां व सींग सहित सभी अंग किसी न किसी काम आते हैं।

अन्य पशुओं की तुलना में गाय का दूध बहुत उपयोगी होता है। बच्चों को विशेष तौर पर गाय का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है क्योंकि भैंस का दूध जहां सुस्ती लाता है, वहीं गाय का दूध बच्चों में चंचलता बनाए रखता है। माना जाता है कि भैंस का बच्चा (पाड़ा) दूध पीने के बाद सो जाता है, जबकि गाय का बछड़ा अपनी मां का दूध पीने के बाद उछल-कूद करता है।

गाय न सिर्फ अपने जीवन में लोगों के लिए उपयोगी होती है वरन मरने के बाद भी उसके शरीर का हर अंग काम आता है। गाय का चमड़ा, सींग, खुर से दैनिक जीवनोपयोगी सामान तैयार होता है। गाय की हड्‍डियों से तैयार खाद खेती के काम आती है।

शारीरिक संरचना : गाय का एक मुंह, दो आंखें, दो कान, चार थन, दो सींग, दो नथुने तथा चार पांव होते हैं। पांवों के खुर गाय के लिए जूतों का काम करते हैं। गाय की पूंछ लंबी होती है तथा उसके किनारे पर एक गुच्छा भी होता है, जिसे वह मक्खियां आदि उड़ाने के काम में लेती है। गाय की एकाध प्रजाति में सींग नहीं होते।

गायों की प्रमुख नस्लें : गायों की यूं तो कई नस्लें होती हैं, लेकिन भारत में मुख्‍यत: सहिवाल (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार), गीर (दक्षिण काठियावाड़), थारपारकर (जोधपुर, जैसलमेर, कच्छ), करन फ्राइ (राजस्थान) आदि हैं। विदेशी नस्ल में जर्सी गाय सर्वाधिक लोकप्रिय है। यह गाय दूध भी ‍अधिक देती है। गाय कई रंगों जैसे सफेद, काला, लाल, बादामी तथा चितकबरी होती है। भारतीय गाय छोटी होती है, जबकि विदेशी गाय का शरीर थोड़ा भारी होता है।

भारत में गाय का धार्मिक महत्व : भारत में गाय को देवी का दर्जा प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास है। यही कारण है कि दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर गायों की विशेष पूजा की जाती है और उनका मोर पंखों आदि से श्रृंगार किया जाता है।

प्राचीन भारत में गाय समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थी। युद्ध के दौरान स्वर्ण, आभूषणों के साथ गायों को भी लूट लिया जाता था। जिस राज्य में जितनी गायें होती थीं उसको उतना ही सम्पन्न माना जाता है। कृष्ण के गाय प्रेम को भला कौन नहीं जानता। इसी कारण उनका एक नाम गोपाल भी है।

निष्कर्ष : कुल मिलाकर गाय का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व है। गाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तो आज भी रीढ़ है। दुर्भाग्य से शहरों में जिस तरह पॉलिथिन का उपयोग किया जाता है और उसे फेंक दिया जाता है, उसे खाकर गायों की असमय मौत हो जाती है। इस दिशा में सभी को गंभीरता से विचार करना होगा ताकि हमारी 'आस्था' और 'अर्थव्यवस्था' के प्रतीक गोवंश को बचाया जा सके।

गौशाला

Sep 14, 2014


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         राजीव भाई द्वारा बताये गये राजनैतिक व्यवस्था परिवर्तन पर चिंतन समारोह 

      हम सभी राजीव भाई से जुड़े हैं, कोई उन्हें अपना गुरु मानता है, कोई अपना आदर्श मानता है, कोई नेता मानता है और कोई सखा   मानता है | लेकिन हम सब उनके विचारों से ओतप्रोत होकर अपने-   अपने सामर्थ्य और प्रतिभा के हिसाब से उनके विचारों के आधार   पर भारत को नवनिर्मित करने का सपना देखते हैं और लगे भी रहते हैं | 
     राजीव भाई को देह छोड़े आठ वर्ष हो गए हैं | इन आठ वर्षों में राजीव भाई को सुनने वाले, उन्हें समझने वाले और उनके बताये नियमों   को अपनाने वालों की संस्था 10 करोड़ से ऊपर है | लेकिन यह   10 करोड़ की संख्या संगठित नहीं है | इसलिए दिखाई नहीं देती |
     सेवाग्राम, वर्धा उनकी कर्मभूमि रही है | 1997 से लेकर 2008 तक राजीव भाई ने यहीं से अपना स्वदेशी विचारों का रथ पूरे देश में   घुमाया, हजारों व्याख्यान किये और स्वदेशी के विचार पर देश   को  नवनिर्मित करने का स्वप्न दिखाया |
     आज पूरे देश में राजीव भाई के विचारों पर आधारित गुरुकुल खुल रहे हैं गौशालायें खुल रही हैं, विष मुक्त कृषि हो रही हैं, व्यवस्था   परिवर्तन के लिए राजनैतिक पहल भी हो रही है यानी राजीव   भाई  ने जिन विषयों पर व्यवस्था परिवर्तन की बात कही है | उन सभी   विषयों पर अलग - अलग ढंग से कार्य चल रहा है और यह कार्य आगे लगातार बढ़ता ही जायेगा इस तरह के हजारों प्रयोग और   भी   होते ही रहेंगे |
     हमारी कोशिश है की उन सभी को एक दिशा दी जा सके ताकि भविष्य में राजीव भाई के विचारों को एक समग्रता दी जा सके और   भविष्य के भारत को गढ़ने में हमारी भी भूमिका हो |
     दिल्ली और पश्चिमी उ. प्र. के कुछ साथियों ने राजीव भाई के विचारों के आधार पर एक राजनैतिक पहल की शुरुआत की है | राजीव   भाई के व्यवस्था परिवर्तन के विचारों को स्वीकार करने वाले   सभी  दलों में हैं | राजीव भाई के साथ काम करने वाले काफी लोग अलग -अलग दलों में भी चले गए काफी लोग आम आदमी पार्टी में गये हैं, कुछ भाजपा में गये हैं और कुछ अन्य छोटी - छोटी   पार्टियां बनाकर   कुछ - कुछ करते रहते हैं या करना चाहते हैं |
     हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं की अपने अंतिम समय में राजीव भाई ने 'भारत स्वाभिमान' बनवाकर व्यवस्था परिवर्तन के लिए एक   बड़ा दल खड़ा करने की तैयारी शुरू कर दी थी लेकिन नीयति   को शायद मंजूर नहीं था उनका सपना अधूरा ही रह गया | अब कुछ   साथी उस पहल को फिर से एक नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं |
     ऐसे ही कुछ साथियों का एक सम्मेलन सेवाग्राम में हो रहा है | 26 -27 जनवरी को...
     इन सभी कार्यक्रमों को राजीव भाई के पूज्य माता जी एवं पिताजी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है | माता जी और पिताजी   ने सभी राजीववादियों से एक जुट होकर राजीव भाई के   सपनों  को पूरा करने का आव्हाहन किया है | 
          आप सभी आमंत्रित हैं | 
     राजीव दीक्षित संस्था,
     10 जोतवानी ले आऊट 
     सेवाग्राम वर्धा रोड, सेवाग्राम ,वर्धा (महाराष्ट्र)
     पंजीकरण के लिए संपर्क करें- 6307329201 /8861631115 /8380027017 /7774069692 

     स्थल : स्वदेशीग्राम, सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्ट्र )

     आप सभी क्रान्तिवीर राजीव दीक्षित जी के सपनो को पूरा करने का संकल्प लेने वर्धा पहुंच रहे है या इस महासंकल्प को धारण कर   रहे  है । आप सब से निवेदन है इस महायज्ञ की व्यवस्था में तन,मन, आत्मा के साथ अर्थ भी महत्वपूर्ण है और यह व्यवस्था हम सब   क्रान्तिवीर  भाइयों को मिलकर ही करनी है अतः आप सब 200/-रुपये अर्थ का सहयोग करे, इस सहयोग में आपकी सदस्यता   सहयोग भी  सम्मिलत माना जायेगा.....वंदेमातरम