भोजन हमेशा अपने शरीर की प्रकृति और मौसम के हिसाब से करें !


राजीव भाई

आज के समय में हमें यह पता नहीं होता कि हमारा शरीर किस प्रकृति का है या हमारे शरीर में किस प्रकृति की प्रधानता है। वात-पित्त-कफ में से हमारे शरीर में असंतुलन किस प्रकार का है,  बिना यह जाने हम भोजन करते हैं और वह भोजन हमारे शरीर की प्रकृति के विरुद्ध होता है जिससे हम रोगों को बढ़ावा देते हैं। जैसे यदि हमारे शरीर में पित्त बिगड़ा है तो पेट से सम्बंधित रोग होंगे । लेकिन हम जो भोजन करते हैं  वह पित्त बढ़ाने वाला होता है जो रोगों को और अधिक बढ़ावा देता है।

पित्त प्रकृति वालों को पित्त शान्त करने वाला या वात बढ़ाने वाला भोजन करना चाहिये जिससे पेट के सभी रोगों को आसानी से ठीक किया जा सके। जिसके शरीर में वात बढ़ा हुआ है उसे पित्त बढ़ाने वाला भोजन करना चाहिये ताकि वात को कम किया जा सके।

वात,पित्त और काफ

इसी प्रकार जिन लोगों का कफ प्रधान होता है उन्हें पित्त बढ़ाने वाला भोजन करना चाहिये और ठण्डी प्रकृति के पदार्थ से बचना चाहिए। सर्दियों में पित्त बढ़ाने वाला भोजन करना चाहिये जिससे जठराग्नि तीव्र रहे और भोजन का पाचन अच्छे से हो, सर्दियों में ठंडी प्रकृति वाला भोजन नहीं करना चाहिए । इसी प्रकार ग्रीष्म काल में पित्त की अधिकता रहती है इसलिये हल्का सुपाच्य भोजन लेना चाहिए और वर्षा ऋतु में जठरागिन मंद होती है इसलिये गर्म पानी और हल्का सुपाच्य भोजन ही लेना चाहिए।

वृद्धावस्था में वायु का प्रकोप अधिक रहता है, युवावस्था में पित्त की अधिकता रहती है और बचपन में कफ की प्रधानता रहती है। इसी प्रकार सुबह कफ का प्रभाव अधिक होता है इसलिए प्राय: सभी को कफ की समस्या रहती है। दोपहर में पित्त का प्रभाव अधिक होता है इसलिए बचपन जल्दी करना चाहिए और शाम को वायु का प्रभाव अधिक होता है। इसलिए उम्र के प्रत्येक पड़ाव के लिए खान-पान की पद्धति उसी प्रकार की होनी चाहिए। बचपन में कफ अधिक बनता है यह अच्छी बात है क्योंकि बच्चे कफ से ही बड़े होते हैं लेकिन अधिक कफ बने तो भी समस्या है, इसलिए बच्चे मीठा अधिक खाते हैं क्योंकि वह कफ दूर करता है। युवावस्था में पित्त अधिक बनता है इसलिए कुछ भी खालें उसका पाचन आसानी से हो जाता है, लेकिन पित्त अगर मात्रा से अधिक बनता है तो सावधान रहना पड़ेगा और वृद्धावस्था में वायु अधिक होने के कारण हल्का और सुपाच्य भोजन ही करें।



Nov 26, 2013


Join WhatsApp : 7774069692
स्वदेशीमय भारत ही, हमारा अंतिम लक्ष्य है |

मुख्य विषय main subjects

     

    आने वाले कार्यक्रम आने वाले कार्यक्रम



       Share on Facebook   


     राजीव भाई की सातवीं
    पुण्यतिथी पर आयोजित स्वदेशी चिंतन समारोह 

     28,29,30 नवम्बर 2017 को निश्चित हुआ है | आप सभी इस समारोह में सादर आमंत्रित है |

     स्थान : स्वदेशी ग्राम,



           पवनार रोड,



           सेवाग्राम, वर्धा,



           महाराष्ट्र- 442102



     संपर्क : शुल्क आदि की
    जानकारी के लिए 8380027016 / 8380027017 

            इन
    नंबरों पर संपर्क करें 
    या whatsapp  कर सकते हैं |

     संपर्क समय : सुबह 11:00
    बजे से शाम 06:00 
    बजे तक 

                { सोमवार से शनिवार, रविवार अवकाश रहता है }