मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें

राजीव भाई


हजारों वर्षों से हमारे यहाँ मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता आया है अभी कुछ वर्षों पूर्व तक गाँवों में वैवाहिक कार्यक्रमों में तो मिट्टी के बर्तन ही उपयोग में आते थे। घरों में दाल पकाने, दूध गर्म करने, दही जमाने, चावल बनाने और अचार रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता रहा है। मिट्टी के बर्तन में जो भोजन पकता है उसमें सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी नहीं होती जबकि प्रेशर कुकर व अन्य बर्तनों में भोजन पकाने से सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैं जिससे हमारे भोजन की पौष्टिकता कम हो जाती है। भोजन को धीरे-धीरे ही पकना चाहिये तभी वह पौष्टिक और स्वादिष्ट पकेगा और उसके सभी सूक्ष्म पोषक तत्व सुरक्षित रहेंगे ।

मिट्टी

महर्षि वागभट्ट के अनुसार भोजन को पकाते समय उसे सूर्य का प्रकाश और पवन का स्पर्श मिलना आवश्यक है जबकि प्रेशर कुकर में पकाते समय भोजन को ना तो सूर्य का प्रकाश और ना ही पवन का स्पर्श मिल पाता, जिससे उसके सारे पोषक तत्व क्षींण हो जाते हैं । और प्रेशर कुकर एल्यूमीनियम का बना होता है जो कि भोजन पकाने के लिये सबसे घटिया धातु है क्योंकि एल्यूमीनियम भारी धातु होती है और यह हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बाहर नहीं निकल पाती है । इसी कारण एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग करने से कर्इ प्रकार के गंभीर रोग होते हैं जैसे अस्थमा, वात रोग, टी.बी. मधुमेह (डायबिटीज), पक्षाघात (पेरेलिसिस), स्मरण शक्ति का कम होना आदि! वैसे भी भाप के दबाव से भोजन उबल जाता है पकता नहीं है।

आयुर्वेद के अनुसार जो भोजन धीरे-धीरे पकता है वह भोजन सबसे अधिक पौष्टिक होता है । भोजन को शीघ्र पकाने के लिये अधिक तापमान का उपयोग करना सबसे हानिकारक है। हमारे शरीर को प्रतिदिन 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व चाहिए जो मिट्टी से ही आते है। जैसे- Calcium, Magnesium, Sulphur, Iron, Silicon, Cobalt, Gypsum आदि। मिट्टी के इन्ही गुणों और पवित्रता के कारण हमारे यहाँ पुरी के मंदिरों (उड़ीसा) के अलावा कर्इ मंदिरों में आज भी मिट्टी के बर्तनों में प्रसाद बनता है। अधिक जानकारी के लिए पुरी के मंदिर की रसोर्इ देखें।





Nov 26, 2013


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         राजीव भाई द्वारा बताये गये राजनैतिक व्यवस्था परिवर्तन पर चिंतन समारोह 

      हम सभी राजीव भाई से जुड़े हैं, कोई उन्हें अपना गुरु मानता है, कोई अपना आदर्श मानता है, कोई नेता मानता है और कोई सखा   मानता है | लेकिन हम सब उनके विचारों से ओतप्रोत होकर अपने-   अपने सामर्थ्य और प्रतिभा के हिसाब से उनके विचारों के आधार   पर भारत को नवनिर्मित करने का सपना देखते हैं और लगे भी रहते हैं | 
     राजीव भाई को देह छोड़े आठ वर्ष हो गए हैं | इन आठ वर्षों में राजीव भाई को सुनने वाले, उन्हें समझने वाले और उनके बताये नियमों   को अपनाने वालों की संस्था 10 करोड़ से ऊपर है | लेकिन यह   10 करोड़ की संख्या संगठित नहीं है | इसलिए दिखाई नहीं देती |
     सेवाग्राम, वर्धा उनकी कर्मभूमि रही है | 1997 से लेकर 2008 तक राजीव भाई ने यहीं से अपना स्वदेशी विचारों का रथ पूरे देश में   घुमाया, हजारों व्याख्यान किये और स्वदेशी के विचार पर देश   को  नवनिर्मित करने का स्वप्न दिखाया |
     आज पूरे देश में राजीव भाई के विचारों पर आधारित गुरुकुल खुल रहे हैं गौशालायें खुल रही हैं, विष मुक्त कृषि हो रही हैं, व्यवस्था   परिवर्तन के लिए राजनैतिक पहल भी हो रही है यानी राजीव   भाई  ने जिन विषयों पर व्यवस्था परिवर्तन की बात कही है | उन सभी   विषयों पर अलग - अलग ढंग से कार्य चल रहा है और यह कार्य आगे लगातार बढ़ता ही जायेगा इस तरह के हजारों प्रयोग और   भी   होते ही रहेंगे |
     हमारी कोशिश है की उन सभी को एक दिशा दी जा सके ताकि भविष्य में राजीव भाई के विचारों को एक समग्रता दी जा सके और   भविष्य के भारत को गढ़ने में हमारी भी भूमिका हो |
     दिल्ली और पश्चिमी उ. प्र. के कुछ साथियों ने राजीव भाई के विचारों के आधार पर एक राजनैतिक पहल की शुरुआत की है | राजीव   भाई के व्यवस्था परिवर्तन के विचारों को स्वीकार करने वाले   सभी  दलों में हैं | राजीव भाई के साथ काम करने वाले काफी लोग अलग -अलग दलों में भी चले गए काफी लोग आम आदमी पार्टी में गये हैं, कुछ भाजपा में गये हैं और कुछ अन्य छोटी - छोटी   पार्टियां बनाकर   कुछ - कुछ करते रहते हैं या करना चाहते हैं |
     हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं की अपने अंतिम समय में राजीव भाई ने 'भारत स्वाभिमान' बनवाकर व्यवस्था परिवर्तन के लिए एक   बड़ा दल खड़ा करने की तैयारी शुरू कर दी थी लेकिन नीयति   को शायद मंजूर नहीं था उनका सपना अधूरा ही रह गया | अब कुछ   साथी उस पहल को फिर से एक नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं |
     ऐसे ही कुछ साथियों का एक सम्मेलन सेवाग्राम में हो रहा है | 26 -27 जनवरी को...
     इन सभी कार्यक्रमों को राजीव भाई के पूज्य माता जी एवं पिताजी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है | माता जी और पिताजी   ने सभी राजीववादियों से एक जुट होकर राजीव भाई के   सपनों  को पूरा करने का आव्हाहन किया है | 
          आप सभी आमंत्रित हैं | 
     राजीव दीक्षित संस्था,
     10 जोतवानी ले आऊट 
     सेवाग्राम वर्धा रोड, सेवाग्राम ,वर्धा (महाराष्ट्र)
     पंजीकरण के लिए संपर्क करें- 6307329201 /8861631115 /8380027017 /7774069692 

     स्थल : स्वदेशीग्राम, सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्ट्र )

     आप सभी क्रान्तिवीर राजीव दीक्षित जी के सपनो को पूरा करने का संकल्प लेने वर्धा पहुंच रहे है या इस महासंकल्प को धारण कर   रहे  है । आप सब से निवेदन है इस महायज्ञ की व्यवस्था में तन,मन, आत्मा के साथ अर्थ भी महत्वपूर्ण है और यह व्यवस्था हम सब   क्रान्तिवीर  भाइयों को मिलकर ही करनी है अतः आप सब 200/-रुपये अर्थ का सहयोग करे, इस सहयोग में आपकी सदस्यता   सहयोग भी  सम्मिलत माना जायेगा.....वंदेमातरम